हीरा कैसे बनता है वो जानकर चकित रह जाएंगे आप

हर किसी को हीरा पसंद होता है। असली हीरा बहुत कीमती होता है। अलग अलग आकार, रंग, लंबाई के हीरे आपने देखे होंगे लेकिन उसके बारे में ये बात शायद आप बिल्कुल नही जानते होंगे।

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कितना पुराना है हीरा?
अगर आपके पास कोई हीरा है तो यकीन करें वो लगभग 300 करोड़ साल पुराना है। चौंकाने वाली बात है पर ये बिल्कुल सच है। अंगूठी, हार, जेवरात वगैरह में लगा हीरा कम से कम 100 से 300 करोड़ साल पुराना होता है। आइए देखते है कि आखिर हम ऐसा क्यों कह रहे है?

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हीरा कैसे बनता है?
प्राकृतिक हीरे का निर्माण बहुत ही खास परिस्थितियों में होता है। एक हीरे को बनाने के लिए कार्बन के अणु पे 60 किलो बार वजन का दबाव लगना आवश्यक है। आप जान लीजिए कि 60 किलो बार वजन तक़रीबन 61182 किलोग्राम जितना होता है यानी कि 60 टन वजन के बराबर। 60 टन वजन को कार्बन अणु के समूह पे 100 करोड़ साल तक रखे तब जाकर हीरा बनता है।

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तापमान तथा ये सब चीजें भी है जरूरी
आपको हीरा बनाने के लिए 900 से 1300 डिग्री सेल्सियस तापमान की भी आवश्यकता होती है। हीरे के निर्माण के लिए ऐसी परिस्थिति सिर्फ पृथ्वी पे एक जगह ही पायी जा सकती है और वो है लिथोस्फियर।

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क्या है लिथोस्फियर?
लिथोस्फियर पृथ्वी की सतह से करीब 150 किमी से भी ज्यादा गहरा भूमि पिंडों वाला भाग है। जहाँ हर धातु एवं तत्व तथा खनिज पायी जाती है। समुद्री भागों में ये 100 किमी जितना होता है। जैसे जैसे नीचे जाएंगे वैसे वैसे तापमान तथा दबाव बढ़ता ही जायेगा। यानी कि स्थिर खंड भूमि के 150 किमी नीचे 900 से 1300 सेल्शियस तापमान पे 60 किलो बार दबाव लगाना होगा तब जाकर 100 या 200 करोड़ साल बाद हीरा बनेगा।

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